शुक्रवार, दिसम्बर 6, 2019
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बजट सत्र का लेखाजोखा: संसद में बना काम न करने का रिकॉर्ड, हुए सिर्फ दो बिल पास

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नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। साल 2018-19 में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 24 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट पेश किया। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। जाहिर है इतना बड़ा बजट है तो इस पर बहस भी होनी चाहिए। देश की जनता के मन में जो सवाल उठते हैं उनके उत्तर उन्हें मिलना चाहिए। इसी काम के लिए देश की जनता अपने प्रतिनिधि चुनकर संसद में भेजती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जनता के नुमाइंदे इन सांसदों ने इतने बड़े बजट पर एक दिन से भी कम बहस की। बाकी का वक्त शोर-शराबे में यूं ही बर्बाद हो गया। काम के घंटों के लिहाज से संभवत: यह सत्र संसद के सबसे खराब सत्रों में से एक रहा। आइए पड़ताल करते हैं।

190 करोड़ से ज्यादा हुए खर्च
एक रिपोर्ट के मुताबिक 29 जनवरी से 9 फरवरी और 5 मार्च से 6 अप्रैल तक दो चरणों में चले बजट सत्र में कुल मिलाकर 190 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए। यह खर्च हम और आप जैसे करदाताओं की जेब से आता है। लेकिन पिछल कुछ दिनों से सदन की कार्यवाही को अगर आप देख रहे हैं तो आप समझ गए होंगे कि कैसे संसद में हमारे पैसे की बर्बादी हो रही है। संसद में सिर्फ हंगामे के अलावा कुछ हो ही नहीं रहा है।

लोकसभा में कितनी बर्बादी
29 बैठकों में कुल 34 घंटे पांच मिनट कार्यवाही हुई।
127 घंटे 45 मिनट कुल मिलाकर हंगामे और जबर्दस्ती कार्यवाही में खत्म हुए।
9 घंटे 47 मिनट में सरकार में अर्जेट कामकाज निपटाए जा सके।
580 तारांकित सवाल पूछे गए थे, लेकिन सिर्फ 17 के मौखिक जवाब दिए गए।
0.58 सवाल (आधे से कुछ ज्यादा) का ही हर रोज जवाब दिया जा सका।
6670 अतारांकित सवालों और शेष तारांकित सवालों के जवाब पटल पर रखे।

इस सत्र में कितने घंटे हुआ काम
शुक्रवार 6 अप्रैल को संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण भी खत्म हो गया। इसी के साथ आप यह भी जानना चाहेंगे कि इस सत्र में कितने घंटे काम हुआ और बजट पर कितने घंटे चर्चा या बहस हुई। तो आपको यह जानकार निराशा होगी कि लोकसभा में 14.1 घंटे और राज्यसभा में मात्र 11.2 घंटे ही बजट पर चर्चा हुई। यह जानकारी हम आपको पीआरएस लेजिस्लेटिव के डाटा के अनुसार दे रहे हैं। दुखद यह भी है कि काम के घंटों के लिहाज से साल 2000 से अब तक यह सबसे खराब बजट सत्र रहा। एक आंकड़ा यह भी है कि इस बजट सत्र में लोकसभा में सिर्फ 33.6 घंटे और राज्यसभा कुल 53.2 घंटे काम हुआ।

क्या है रिकॉर्ड
पिछले कुछ सालों के बजट सत्रों से तुलना की जाए तो आम तौर पर बजट सत्र में बजट पर चर्चा के लिए निर्धारित घंटों के करीब 20 फीसद या 33 घंटे बहस होती है। बजट सत्र में बजट पर चर्चा के अलावा भी कई अन्य मुद्दे होते हैं। इस तरह से साल 2018 के बजट सत्र में कुल 21 फीसद (लोकसभा) और 31 फीसद (राज्यसभा) में काम हुआ। अगर आप सोच रहे हैं कि यह सबसे खराब सत्र था तो ठहरिए। इससे भी खराब सत्र गुजर चुके हैं और पीआरएस लेजिस्लेटिव के आंकड़ों के मुताबिक यह चौथा सबसे खराब सत्र था। आंकड़ों के मुताबिक 2010 का शीतकालीन सत्र प्रोडक्टिविटी के लिहाज से सबसे खराब सत्र रहा था। इसके बाद 2013 और 2016 के संसद सत्रों का नंबर आता है।

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