नई दिल्ली (जेएनएन)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं के अर्थशास्त्र के प्रश्नपत्र को लेकर यह बात सामने आई है कि सिर्फ एक छात्रा को अच्छे नंबर दिलाने के लिए ट्यूटर ने 12वीं अर्थशास्त्र का पेपर लीक किया था। इसके बाद आरोपी ने चंडीगढ़ में अपनी भाभी को पेपर भेज दिया। भाभी के जरिये पेपर सैकड़ों लोगों के वाट्सएप पर पहुंच गया।

वहीं, जांच के दौरान यह भी पता चला है कि हिमाचल प्रदेश के ऊना स्थित डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य अतुल महाजन व यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ऊना शाखा के मैनेजर शेर सिंह ने घोर लापरवाही बरती थी, जिससे प्रश्नपत्र लीक हुआ था। दोनों ने अपनी ड्यूटी करने के बजाय दूसरों पर जिम्मेदारी थोप दी थी।

लापरवाही सामने आने पर क्राइम ब्रांच ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मंगलवार को सीबीएसई के अध्यक्ष के अलावा स्कूल के प्रबंधन व बैंक के मुख्य शाखा के अधिकारी को भेज दिया है।

सीबीएसई के अध्यक्ष को डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल की मान्यता रद करने व प्रबंधन को स्कूल के प्रधानाचार्य को नौकरी से हटाने की संस्तुति की गई है। बैंक के रीजनल मैनेजर से ब्रांच मैनेजर के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

क्राइम ब्रांच का कहना है कि अगर बैंक मैनेजर व प्रधानाचार्य पर रिश्वत लेकर पेपर लीक करने के सुबूत मिलते तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता। रिश्वत की बात सामने न आने पर स्कूल प्रबंधन, सीबीएसई अध्यक्ष व बैंक के रीजनल मैनेजर ही इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।

सिर्फ एक छात्रा के लिए पेपर लीक किया गया था

क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार के मुताबिक जांच में अबतक पैसों के लेनदेन का मामला सामने नहीं आया है। आरोपित राकेश ने ट्यूशन पढ़ने वाली 12वीं की छात्रा के लिए ही पेपर लीक किया था। बाद में उसने चंडीगढ़ में रहने वाली अपनी भाभी अंजू बाला को इसलिए पेपर भेज दिया था ताकि वह उसके किसी रिश्तेदार या परिचित के काम आ जाए।

अंजू बाला ने दिल्ली के रोहिणी में रह रही ननद पूजा व पूजा ने रिश्तेदार नीतू को वाट्सएप पर पेपर भेज दिया था। किसी ने भी पैसे की सौदेबाजी नहीं की।

ऐसे बरती लापरवाही

जांच में पता चला है कि डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य अतुल महाजन को जवाहर नवोदय पब्लिक स्कूल पेखूबेरा, ऊना का सेंटर सुपरिटेंडेंट बनाया गया था। प्रधानाचार्य ने घरेलू कार्य के बहाने अपनी जगह स्कूल के कॉमर्स व अर्थशास्त्र विषय के शिक्षक राकेश कुमार को सेंटर सुपरिटेंडेंट नियुक्त कर दिया था।

बैंक मैनेजर ने भी इसी तरह लापरवाही बरती। सीबीएसई के नियम के मुताबिक मैनेजर ही स्ट्रांगरूम से प्रश्नपत्रों की गिनती कर बंडल के कोड के हिसाब से उसे सेंटर सुपरिटेंडेंट को दे सकते हैं।

23 मार्च को कंप्यूटर साइंस के पेपर वाले दिन मैनेजर शेर सिंह घर पर ही मौजूद रहे और उन्होंने कैशियर ओम प्रकाश को प्रश्नपत्र देने के लिए भेज दिया।

उन्होंने स्ट्रांग रूम में अपने सामने राकेश कुमार को प्रश्नपत्र नहीं दिया बल्कि उसे खुद प्रश्नपत्र लेने दिया। मैनेजर अगर अपने कर्तव्य का पालन करते और खुद नियमों का पालन करते हुए सेंटर सुपरिटेंडेंट को प्रश्नपत्र सौंपते तो प्रश्नपत्र लीक की घटना नहीं होती।

ऊना में बैंक मैनेजर व प्रिंसिपल से पूछताछ

सीबीएसई 12वीं के अर्थशास्त्र का पेपर लीक होने के मामले में क्राइम ब्रांच दिल्ली की टीम मंगलवार को ऊना (हिमाचल प्रदेश) पहुंची। टीम ने डीएवी स्कूल, यूनियन बैंक शाखा और जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) में पूछताछ की।

मंगलवार शाम क्राइम ब्रांच की सात सदस्यीय टीम ऊना पहुंची। टीम ने डीएवी स्कूल ऊना में प्रधानाचार्य अतुल महाजन से उनके कक्ष में पूछताछ की। आरोपित राकेश शर्मा, क्लर्क अमित और चपरासी अशोक कुमार से संबंधित अहम जानकारियां लीं। उनसे संबंधित कागजात लिए।

अतुल से करीब 40 मिनट तक पूछताछ की गई। इसके बाद टीम यूनियन बैंक शाखा ऊना पहुंची। यहां पर बैंक प्रबंधक तथा अन्य स्टाफ से पूछताछ की और रिकॉर्ड को कब्जे में लिया। इसके बाद पेखुबेला स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय प्रबंधन से भी पूछताछ की गई।

परीक्षा केंद्र अधीक्षक रहे राकेश शर्मा से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए। टीम ने कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। वह आरोपित राकेश शर्मा, अमित और अशोक कुमार को क्षेत्रीय अस्पताल ले गई, जहां उनकी मेडिकल जांच करवाई गई।

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